मुख्य उपलब्धियां  

 

मान्यकृत समेकित नाशीजीव प्रबंधन प्रौद्योगिकियां 

नाशीजीव पूर्व चेतावनी तंत्र तथा  वितरण मानचित्र 

डेटाबेस व साफ्टवेयर 

जैवघटकों  का बड़े पैमाने पर उत्पादन 

कपास 

स्थान 

आई पी एम तकनीक 

आस्था, नांदेड़ जिला, महाराष्ट्र

 

  • क्षेत्र स्वच्छता का ध्यान रखें व घास पात हटाते रहें 

  • एक ही किस्म की अनुमोदित संकर प्रजाति और संकालित संशोधित  बीज का प्रयोग करें (imidacloprid @7 ग्राम / किलो बीज)

  • परभक्षियो व परजीवीयों के संरक्षण के लिए किनारों पर मक्का और लोबिया का रोपण. पक्षी बसेरा के रूप में कपास की हर 9 पंक्ति के बाद  Setaria स्पीशीज़ का रोपण

  • अमेरिकन सुंडी से बचाव के लिए फेरोमोन  जाल (1 / 10 @ हेक्टेयर) की स्थापना

  • उचित समय पर Trichogramma chilonis के अंडे bollworm द्वारा दिये अण्डे के समकालीन रिलीज करना

  • Trichogramma या NSKE 5% के दूसरे छिड़काव के बाद  HaNPV का 250 LE / हेक्टेयर  दर से छिड़काव करना

  • आवश्यकता के अनुसार पर्यावरण अनुकूल कीटनाशकों / फफूँदनाशी छिड़काव करना

पानीहारी, सिरसा जिला, हरियाणा

 

  •  H 1098 किस्म की बुवाई  

  • नीम बीज पाउडर सत्त का 12.5 किलो प्रति हेक्टेयर दर से + Beauveria bassiana का 1.25 किलो प्रति हेक्टेयर दर से उपयोग करें

  •  Alphamethrin 500 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर +. कांफिडर 100 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर  की दर से उपयोग करें

  • नीम बीज पाउडर सत्त का 12.5 किलो प्रति हेक्टेयर दर से उपयोग करें         

  • Quinalphos 2.250 लीटर / हेक्टेयर दर से उपयोग करें

मनसा, पंजाब

 

 

 

 

  • अगेती, लघु अवधि, CLCV और  327 LD, 1556 LH, 651 अंकुर, गंगा कावेरी 151 और Whitegold जैसे कीटों के प्रति प्रभावशून्य

  • सीडा, Abutilon, Dhatura, Ageratum और अन्य खरपतवार जो  कपास की फसल के आसपास है नष्ट कर दिये जायें

  • कपास के खेतों और  खेतों के आसपास भिन्डी, अरहर और मूंग न बोयें

  • गहरी जुताई, अच्छी सिंचाई करें, मृदा जांच के आधार पर अनुग्रहित देसी किस्मों के लिए ३० किलो ग्राम प्रति एकड़, संकर प्रजाति के लिए ६० किलो ग्राम प्रति एकड़ नाइट्रोजन,   १२ किलो ग्राम प्रति एकड़ की दर से पोतास्सियम ओक्सिदे का प्रयोग करें

  •  १५ से १७ मई के दौरान बोनें वाली  अमेरिकन  देसी प्रजाति कपास के लिए ४ किलोग्राम प्रति एकड़, एर्बोरियम कपास के लिए ३ किलोग्राम प्रति एकड़,  संकर प्रजाति कपास के लिए  १ से ५ किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बीज प्रयोग करें

  • रोपाई के समय लाइन से लाइन  की दूरी ६७.५ सेंटीमीटर और पोधों से पोधों के बीच की दूरी  ४५ सेन्टीमीटर और देसी एवं संकर प्रजाति के लिए क्रमशे ६७.५x७५  सेन्टीमीटर निर्धारित करें

  • रोपाई के एक माह पश्चात सिंचाई करें, तत्पश्चात हाथ से विरलें

  • ट्रक्टर से नराई  करें

  • सप्ताह में दो बार नियमित रूप से कीट पतंगों की निगरानी करें

  • आवश्यकता के अनुसार कांफिदोर  २०० एस एल १०० मिलीलीटर , असतामिप्रिड २० एस पी ५० ग्राम,  ठिओमेथोक्षम २५ डब्ल्यू जी १०० गें प्रति हेक्टेयर की दर से तेला व चेपा जैसे नाशीजीवों के लिए प्रयोग करें

ऊपर

धान

स्थान 

आई पी एम तकनीक 

दूधली, देहरादून

 

  • हरी खाद के लिए ढैंचा रोपण

  • कार्बोंदाज़िम    से बीज उपचार

  • पौधे की जड़ को सुडोमोनास  (५ मिलीलीटर प्रति पानी)  से उपचारित करें 

  • 2-3 पौधे प्रति हिल   रोपण करें

  • उर्वरक एवं जिंक सल्फेट का उचित मात्रा में प्रयोग करें

  • पौधे की जड़ को सुडोमोनास  (५ मिलीलीटर प्रति पानी)  से उपचारित करें

  • पीला तना बेधक के लिए फेरोम़ोन ट्रेप  स्थापित करें

  • आवश्यकता के अनुसार ट्राईकोग्रामा जेपोनिकम छोडे 

  • प्रध्वंस के लिए ट्रीसैक्लोजोल  छिडकें

  •  हाथ से खरपतवार प्रबंधन करें 

  • नियमित रूप से कीटों, रोगों  मित्र कीटों की निगरानी करें  

सबोली

 

  • डेंचा का हरी खाद के रूप में प्रयोग करें

  • कार्बोंदाज़िम   से बीज उपचार

  • पौधे की जड़ को सुडोमोनास  (५ मिलीलीटर प्रति पानी)  से उपचारित करें  

  • 2  पौधे प्रति पहाड़ी रोपण करें

  • उर्वरक एवं जिंक सल्फेट का उचित मात्र में प्रयोग करें

  • पीला तना बेधक के लिए फेरोम़ोन ट्रेप  स्थापित करें (५ प्रति हेक्टेयर )

  • मकङों की संख्या बढ़ाने के लिए घासपात के बण्डल स्थापित करें (२० प्रति हेक्टेअर)

  • पीला तना बेधक और पत्ती मोङक  के लिए परजीवी ट्राईकोग्रामा जेपोनिकम छोडे  

  • प्रध्वंस के लिए ट्रीसैक्लोजोल  छिडकें

  • भूरा फुदका के लिए बुप्रोफेजिम व थयोमेथ्क्साम का छिडकाव करें

  • फसल की नियमित रूप से निगरानी करें

लुधियाना

  • अनुमोदित किस्म को बोयें

  • रोग रहित सवस्थ्य बीज का प्रयोग करें

  • कार्बोंदेज़िम व स्त्रेप्तोसिएक्लिन से बीज उपचारित करें

  • पौध को कार्बोंदाज़िम के घोल से उपचारित करें

  • उर्वरकों की अनुमोदित मात्रा का प्रयोग करें

  • संक्रमित पौधों को उखाड़ दें

  • पीला तना बेधक की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रेप  स्थापित करें

  • ट्राईको कार्ड रिलीज़ करना

  • कीटनाशकों और फफुन्दिनाश्कों का आवश्यकता अनुसार प्रयोग

फैजाबाद

 

  • मेंढों  की छंटाई, ग्रीष्मकालीन जुताई व पौधों के अवशेषों को नष्ट करें

  • जुताई से पहले बीज उपचारित करें

  • कार्बनडेजिम व स्त्रेप्तोसेक्लिन से बीज उपचारित करें

  • अच्छी तरह से पोखर किये खेत में संस्तुतित दूरी पर समय से रोपाई करें (१५ जुलाई से पहले)

  • बोने से पहले पौध की टिप की कट्टिंग करें

  • खेतों, मेंढों व सिंचाई के आसपास के स्थानों से खरपतवार को नष्ट करें

  • जिंक व अन्य उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करें व जल का उचित प्रबंधन  करें

  • फसल की साप्ताहिक अन्तराल पर निगरानी करें

  • तना बेधक के लिए फेरोम़ोन ट्रेप  स्थापित करें व  ट्राईकोग्रामा  जेपोनिकम रिलीज़ करें

  • गुन्धी बग के लिए कीटनाशकों  का प्रयोग करें

छाजपुर खुर्द, पानीपत, हरियाणा

 

  • गेहूं के पश्चात डेंचा बोयें

  • कार्बनडेजिम फफुन्दिनाशक से बीज सोधित करें

  • एक हिल  पर २ से ३ पौधों की रोपाई करें

  • उचित मात्र में खाद डालें (नाईट्रोजन : ८०% , फास्फोरस ५०%, पोटाश ३०%)

  • तना बेधक कीटों की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रेप  स्थापित करें

  • ट्राईकोग्रामा जेपोनिकम परजीवी को खेतों में दो बार छोड़े

  • प्रध्वंस रोग के लिए ट्राईसाईंक्लोजोल , जीवाणू अंगमारी के लिए स्त्रेप्तोसाईंक्लीन  व पर्णछद विगलन के लिए कार्बनडेजिम घोल का प्रयोग करें

सरूरपुर जिला बागपत उत्तरप्रदेश

 

  • कार्बनडेजिम फफुन्द्नाशी से २ ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बीज शोधित करें

  • कीट पतंगों व उनसे होने वाले रोगों पर निगरानी रखें

  • तनाबेधक व पत्ती लपेटक कीटों के लिए परजीवी कीट ट्राईकोग्रामा जापोनिकम १ से ५ लाख प्रति हेक्टेयर की दर से खेतों में छोड़े

  • आर्थिक हानि के अधिक होने पर ही रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें

तिलवाडी, देहरादून , उत्तराखंड

 

  • ढेंचा को हरी खाद के रूप में प्रयोग करें

  • ट्राईकोडरमा से बीज उपचार  करें

  • एक हिल  पर २ से ३ पौधों की ही रोपाई करें

  • उचित मात्रा में  खाद डालें

  • नाईट्रोजन  ६०% फास्फोरस ५०%, पोटाश ४०% और जिंक सल्फेट २५ किल्ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें

  • तना बेधक की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रेप  स्थापित करें

  • जीवाणू जनित अंगमारी के लिए स्टरेपटोसाईंक्लीन  का प्रयोग करें

  • हाथ से खरपतवार  हटायें

  • नियमित रूप से कीटों, उनसे होने वाले रोगों एवं कीटों की निगरानी करें

जैविक धान

जैविक पौध संरक्षण मोड्यूल 

कैथल

  • स्वच्छ उन्नत एवं सुरक्षित गोबर खाद से खेत तैयार करें

  • सेस्बेनिया/ मूंग/ उड़द से पल्वारें

  • रॉक फास्फेट का प्रयोग करें

  • तना बेधक कीट की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रेप  स्थापित करें

  • मकड़ा व अन्य मित्र कीटों के संरक्षण के लिए ट्राईकोग्रामा  जेपोनिकम परजीवी छोड़े

  • फसल को ऊपर से काटें

ऊपर

दालें

अरहर

स्थान 

आई पी एम तकनीक 

होटला जिला नांदेड

 

  • बी एस एम आर -७३६ प्रजाति को बोयें

  • खेत को स्वच्छ रखें

  • फेरोमोन ट्रेप स्थापित करें

  • पौधों को हिलाएं

  • नीम सत और एच ऐ एन पी वी का छिडकाव करें

मिर्ज़ापुर एव चंदौली , वाराणसी, उत्तरप्रदेश

 

  • अरहर को म्लानि से बचाने के लिए बुवाई से पहले गोबर खाद में १० ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से ट्राईकोग्रामा मिला कर भूमि शोधन करें,

  • नाशीजीवों, रोगों की प्रतिरोधक व अच्छी फसल देने वाली किस्मों को ही बोयें

  • फाईटोफ्थोरा रोग से बचाव के अरहर को मेंड़ों के बीच बोयें

  • फेरोमोन ट्रेप  १० प्रति हेक्टेयर  की दर से स्थापित करें

  • अमेरिकन सुंडी से बचाव के लिए २५ प्रति हेक्टेयर की दर से पक्षी बसेरों को स्थापित करें

  • सितम्बर व अक्टूबर में नीम तेल २% तथा एन एस के ई  ५% के क्रमश: १ व २ छिडकाव करें

  • सितम्बर व अक्टूबर में एच एन पी वी ५०० लीटर प्रति हेक्टेयर तथा एंडोसल्फान २ लीटर प्रति  हेक्टेयर की दर से खेतों में छिडकाव करे

गुलबर्गा, कर्नाटक

 

  • ट्राईकोडर्मा से १० ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बीज शोधित करें ताकि म्लानि के प्रभाव से बचा जा सके

  • निगरानी के लिए ५ प्रति हेक्टेयर की दर से फेरोमोन ट्रेप   स्थापित करें

  • ज्वार को  अंतर: फसल के रूप में बोयें

  • लार्वों को पौधों से हटाने के लिए पौधों को हाथ से अच्छी तरह से हिलाएं

  • ४५० लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से एच एन पी वी का छिडकाव करें

  • कच्चे नीम सत का ५% प्रयोग करें  (एन एस के ई )

  • अधिक नाशीजीव होने की स्थिति  में रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करे

चना 

अम्बदागांव, बद्नापुर जिल जालन

  • ट्राईकोडर्मा व रिजोबियम के  स्थानीय  उत्पादों से बीज शोधित करें

  • धनिया को अंत: फसल के रूप में बोयें

  • फेरोमोन ट्रेप व पक्षी बसेरों को स्थापित करें

  • यांत्रिक तरीके से लार्वे एकत्रित करें

  • एच एन पी वी का छिडकाव करें

  • रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें

छाजपुर, सिरसा (हरियाणा), जयपुर (राजस्थान), होटाला (नांदेड)

  • बीज उपचारित करें (ट्राईकोडर्मा  ग्राम प्रति किलोग्राम बीज  + विटावेक्स २ ग्राम प्रति किलोग्राम बीज + रइजोबियम )

  • अंतरा सस्यं करें

  • मृत पक्षी बसेरों को स्थापित करें

  • २ प्रति हेक्टेयर की दर से फेरोमोन ट्रेप  स्थापित करें

  • २५०  लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से एच एन पी वी का छिडकाव करें

  • नीम सत ५% व आवश्यकता अनुसार एन्डोसल्फान का प्रयोग करें

ऊपर

  तिलहन

सरसों

 

  • ट्राईकोडर्मा (१० ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से बीज उपचारित करें

  • बुवाई की तिथि १५-२५ अक्टूबर

  • अनुमोदित किस्म टी-५९ का प्रयोग

  • रोग या कीट आने की स्थिति में आवश्यकता अनुसार फफूंदीनाशक  और रासायनिक कीटनाशको का प्रयोग

  • एफिड ग्रस्त टहनियों को खेत से हटायें

नवगांव, राजस्थान

 

  • सस्यकरण योजनाबद्ध तरीके से करें ताकि  पहली फसल के रोग  से इस फसल को हानि न हो

  • कवकीय जीवणू और कीटों की अवशिष्ट संख्या को कम करने के लिए ग्रीष्मकालीन जुताई करें

  • रोगों की जांच के लिए खेत से पिछली फसल के अवशेषों को हटाया जाये

  • मुख्य कीटों से बचने के लिए  ११-२५ अक्टूबर के बीच फसल  बोयें

  • अनुमोदित मात्र में रासायनिक खाद का प्रयोग करें

  • मृदा जनित रोगों के लिए ४ ग्राम प्रति किलोग्राम बीज को ट्राईकोडर्मा विरिडी  से शोधित करें

  • १ किलोग्राम ट्राईकोडर्मा व २५ किलोग्राम गोबर खाद प्रति एकड़  में  मिला कर भूमि शोधन करें

  • श्वेत किट व अन्य मृदा जनित रोगों के प्रबंधन के लिए २% लहसुन अर्क का प्रयोग करें

  • अल्टरनेरिया व श्वेत किट से बचाव के लिए डाईथेन एम्-४५ ०.२% का छिडकाव करें

  • बुरी तरह से क्षतिग्रस्त पौधों को खेतों में से उखाड़ दिया जाये

  • नियमित निराई  से पेंटेड बग की संख्यां में कमी आती है

  • मित्र कीटों को संरक्षित करें

  • यदि आवश्यक हो तो २५ किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से ५% मलाथियन पाउडर का इस्तेमाल करें

 गुडगाँव (हरियाणा)

  • टी-५९ प्रजाति का प्रयोग करें

  • अनुकूल तारीखों १५-२५ अक्टूबर के बीच ही फसल बोयें

  • ट्राईकोडर्मा    विरिडी  (4 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से बीज उपचारित  करें

  • आक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में ही चेपा  ग्रस्त  टहनियों की यांत्रिक ढंग से चुनाई कर दें

स्थान 

आई पी एम तकनीक 

भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान, नई दिल्ल

बुवाई पूर्व समय

  • खेत को गर्मी में गहरा जोतें

  • ऐसे  खेत तैयार किये जाएँ जहाँ से पानी की निकासी ठीक से हो पाए

  • फसल को स्वच्छ रखें एवं मल्बें को हटाते रहें

  • गैर अतिसंवेदनशील होस्ट के साथ फसल रोटेशन करें

  • पौधों को  उचित खुराक दें  (नाईट्रोजन ४०%, पोटाश ४०%, सल्फेट ४०%)

बुवाई के समय

  • बुवाई का समय १६ से ३१ अक्टूबर रखें

  • स्कालोर्शिया रहित उच्च गुणवता के बीजों का प्रयोग करें

  • १० ग्राम प्रति किलोग्राम बीज ट्राईकोडर्मा का प्रयोग उपचार के लिए करें 

  • १ किलो ट्राईकोडर्मा २५ किलोग्राम प्रति एकड़ में मिला कर भूमि शोधन करें

  • उचित अन्तराल एवं उचित बीज दर रखें

वानस्पतिक अवस्था

  • पौधों की अनुकूल संख्या बनाये रखना

  • चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार (शेनोप्दियम एल्बम) का उन्मूलन करें  

  • आवश्यकता अनुसार एवं विवेकता से सिंचाई करें

  • पुष्पित या विकसित  अवस्था

  • २% की दर से बढती अवस्था में ट्राईकोडर्मा हर्ज़ियानम   का प्रयोग करें

  • संक्रमित तने व ठूंठ को इकठ्ठा  करके जला दें

 

मूंगफली

Location  IPM module
मिर्जावाली, किक्रेल और नेलोखी  
  • इमिड़ाक्लोप्रिड २ मिली लीटर प्रति किलोग्राम  और   ट्राईकोडरमा  हर्ज़िअनम १० ग्राम प्रति किलोग्राम की  दर  से बीज उपचारित करें 

  • १५ दिन पहले से ट्राईकोडरमा  हर्ज़िअनम को ४ किलोग्राम प्रति हेक्टेयर  की दर से ५० किलोग्राम में मिलाएं , उसके बाद इसे  मिटटी में डालें 

  • २५० किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से नीम केक से मृदा संशोधन करें 

  • लीफ स्पोट रोग के शुरूआती लक्षण दिखाई देने पर पतियों पर मेन्कोजेब का २ग्रम प्रति लीटर पानी की दर से छिडकाव करें.

वल्लभनगर 

 

 

  • ग्रीषम्कालीन गहरी जुताई करें (अप्रैल- मई)

  • २५० किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर नीम केक से मृदा संशोधन करें 

  • इमिड़ाक्लोप्रिड २ मिली लीटर प्रति किलोग्राम  और   ट्राईकोडरमा  हर्ज़िअनम १० ग्राम प्रति किलोग्राम की  दर  से बीज उपचारित करें 

  • १५ दिन पहले से ट्राईकोडरमा  हर्ज़िअनम को ४ किलोग्राम प्रति हेक्टेयर  की दर से ५० किलोग्राम में मिलाएं , उसके बाद इसे  मिटटी में डालें 

  • अनुमोदित किस्म जे एल -२४ बोयें 

  • बोने की तिथि (१५ जून - ७ जुलाई )

  • टी आकार के पक्षी बसेरों को स्थापित करें 

  • लीफ स्पोट और रस्ट से बचाव के लिए बोने के ४५ से ६० दिन बाद पतियों पर फफूंदीनाशक का छिडकाव करें (०.०५% कार्बनडेजिम + मेन्कोजेब ०.२%)

ऊपर

  सब्जियां

भिन्डी 

Location  IPM module

गाजियाबाद 

 

  • प्रचलित येल्लो मोजाईक वायरस प्रतिरोधक संकर प्रजाति सन-४० और मखमली का प्रयोग करें 

  • ज्वार या बाजरा को सीमान्त फसल के रूप में लगायें 

  • पीले चिपचिपे पोलिथीन ट्रेप को अरंडी तेल व डेल्टा ट्रेप के साथ चिपका कर सफ़ेद मक्खी के लिए स्थापित करें 

  • एरिअस विट्टेल्ला की निगरानी के लिए  पक्षी बसेरों का निर्माण १० प्रति एकड़ करें व फेरोमोन ट्रेप का ५ प्रति हेक्टेयर की दर से स्थापित करें 

  • पतंगों, सफ़ेद मक्खी व माईट के लिए एन एस के ई ५% की दर से छिडकाव करें 

  • ट्राईकोग्रमा किलोनिस को पांच बार साप्ताहिक अन्तराल पर फसल बोने के ४२ दिन बाद छोड़ें 

  • इमिदाक्लोप्रिड, सय्पर्मेथ्रिन, क्लोरपायरीफोस और फेनवेल्रेट  कीटनाशकों के ३-४  छिडकाव  करें 

बैंगन

  • भूमि की सतह से उठी पौधशाला बनाना

  • भूमि तापिकरण करे

  • ४ ग्राम प्रति किलोग्राम बीज दर से ट्राईकोडर्मा विरिडी से बीज शोधित करें

  • खेत में चिडियों के बैठने के लिए प्रति १० एकड़ में अड्डे लगाने चाहिए ताकि वे कीटों का शिकार कर सकें

  • होपर के लिए डेल्टा एव चिपचिपे पदार्थ वाले ट्रेप तथा सफ़ेद मक्खी वाले फेरोमोन ट्रेप ५ प्रति है की दर से ल्युसीनोडेस आर्बेनेलिस के लिए स्थापित करें

  • लीफ होपर, चेपा व माईट से बचाव के लिए एन एस के ई ५% के तीनो छिडकाव प्रति है की दर से खेत में करें

  • पौधों की पक्तियों के साथ साथ नीम खली २५० किलोग्राम प्रति है की दर से खेत में मिलाएं

  • प्ररोह ओर फली बेधक के लिए १ लाख प्रति है की दर से टी ब्रेसेलेनसिस अंड परजरवी को छोड़े

  • अंडों के समूह, लारवा व हड्डा भ्रंग के प्रिपक्वों को इकठ्ठा कर  नष्ट करें

  • रोग से प्रभावित पत्तियों को तोड़ का नष्ट कर दिया जाये

  • फसल पकने के दौरान एक छिडकाव एमीडक्लोपरिड, सायपरमेंथरीन का करें

  • पीली शिरा मोजेक प्रतिरोधी संकर किस्मो सन ४- ओर मखमली को रोपें

  • जवार / मक्का को सीमान्त फसल के रूप में बोयें 

  • पीले पदार्थ के ट्रेपस कसे केस्टर तेल के साथ आलेप करें व डेल्टा पाश को सफ़ेद मक्खी से बचाव के लिए स्थापित करें

  • एन एस के इ  ५% के तीन छिडकाव होपर, सफ़ेद मक्खी व घुन से बचाव के लिए करें

  • रोपाइ के ४२ दिन पशचात साप्ताहिक अन्तराल में परिजिवीयो ट्राईकोडर्मा  किलोनिस को ५ बार छोड़ें

  • यदि कोई पौधे पिली शिरा मोजेक से ग्रसित है तो बेधक ग्रसित को समय समय पर निकालते  रहें

  • एमिडक्लोपरिड, सायपरमेथरीन, क्लोरपइरिफस, ओर फेनवेलेरेट कीटनाशियो के ३-४ छिडकाव करें  

अगेती  फूलगोभ 

पलरखुर्द (सोनीपत ), अनंतपुर (जयपुर)

 

नर्सरी 

  • मृदा तापिकरण / भूमि की सतह से उठी पौधशाला / ट्राईकोडरमा हर्जिअनम  से ४ ग्राम प्रति किलोग्राम बीज दर से बीज उपचारित करें /  २.५ किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से  गोबर खाद  व ५० ग्राम प्रति मीटर स्क्वेयर  नीम केक से मृदा संशोधन करें 

रोपाई से पहले

  • भूमि की सतह से उठी पौधशाला बनाना / ट्राईकोडरमा हर्जिअनम ४ ग्राम प्रति लीटर में पौधों को डुबोयें/ डी.बी.एम और स्पोडोप्टेरा लिट्युरा के समाधान के लिए फेरोमोन ट्रेप स्थापित करें 

रोपाई के बाद 

  • कीडों के अंडों, बड़े लार्वें  को हाथ से उठायें/  नवजात  लार्वें के ढेर  से ग्रसित पत्तियों  को  हाथ से तोड़ें 

  • आवश्यकता अनुसार ५% एन. एस.के.ई, एन.पी.वी   का प्रयोग आक्रमण होने की शुरुआत में  करें और बाद में कीटों से बचाव के लिए नोवालुरों/स्पिनोसाद/मेन्कोजेब जैसे कीटनाशकों का प्रयोग करें 

 

 

पछेती रबी फूलगोभी  बंदगोभी

पलरी खुर्द (सोनीपत ), अनंतपुर (जयपुर)

 

 

नर्सरी 

  • मृदा तापिकरण / भूमि की सतह से उठ पौधशाला / ट्राईकोडरम हर्जिअनम  से ४ ग्राम प्रति किलोग्राम बीज दर से बीज उपचारित करें /  २.५ किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से  गोबर खाद  व ५० ग्राम प्रति मीटर स्क्वेयर  नीम केक से मृद संशोधन करें 

 रोपाई से पहले

  • भूमि की सतह से उठ पौधशाल बनाना / ट्राईकोडरम हर्जिअनम ग्राम प्रति लीटर में पौधों को डुबोयें/ डी.बी.एम और स्पोडोप्टेर लिट्युरा के समाधान के लिए फेरोमोन ट्रेप स्थापित करें 

  • फूलगोभी की २५ पंक्तियों के बाद सरसों की दो पंक्तियों की बुवाई करें 

रोपाई के बाद 

  • पीले चिपचिप ट्रेप पंख वाल चेपों को पकड़ने के लिए स्थापित करें 

  • आवश्यकता अनुसार एन.एस.के.ई  ५%, एथोफेंप्रोक्स/दिब्लूबेन्दमिदे, मेन्कोजेब का प्रयोग करें 

बंदगोभी

गाँव जदीपानी

बुवाई से पहले (अप्रैल - मई ) 

  • बुवाई से ३ हफ्त पहले १०-१५ सेंटीमीटर ऊँचाई की भूमि से उठ बेड्स गोबर की खाद का प्रयोग करक बनायेस उन्हें पारदर्श प्लास्टिक से ढक दें 

 बुवाई (जून) 

  • इमिड़ाक्लोप्रिड  ३ ग्राम प्रति १०० ग्राम कार्बनड़ेजिम ग्राम प्रति १०० ग्राम बीज दर से बीज उपचारित करें 

नर्सरी अवस्था (जून -जुलाई)

  • कार्बनड़ेजिम का  २.५ ग्राम प्रति लीटर की दर से १ छिडकाव करें 

 प्रत्यारोपण 

  • जैव नियंत्रकों  (ट्राईकोडरमा  हर्जिअनम और स्यूडोमोनास फ्लोरीसेन्स ) के घोल में सीडलिंग डुब कर उपचारित करें 

  • प्रमुख  लेपिदोप्तेरस कीटों की निगरान फेरोमोन पाश से करें 

 अगेती वृद्धि की अवस्था (जुलाई -अगस्त )

  • भूमि से उठ पौधशाला में बुवाई करें और पानी के जम होने से रोकने का प्रबंध करें 

  • नीम से बन कीटनाशकों /एस.एल. एन.पी.वी. का प्रयोग कीटनाशकों के प्रभाव को करने के लिए करें 

  • स्पोडोप्टेरा लिट्युरा के लार्वों और अण्डों को हाथ से उठायें 

 पछेती वृद्धि की अवस्था  (सितम्बर -अक्टूबर )

  • मेन्कोजेब का २ ग्राम प्रति लीटर की दर से प्रयोग करें 

शिमला मिर्च 

करनाल 

 

 

नर्सरी की स्थापना 

  • पौधशाला से उठ नर्सर बनायें 

  • तीन हफ्ते के लगभग पारदर्श प्लास्टिक से मृदा का तापिकरण करें 

  • ट्राईकोडरमा  हर्जिअनम मिल हुय गोबर खाद को  नर्सरी की मृदा में मिलाएं 

  • कोलर रोट से बचाव के लिए साफ़ फफुन्दिनाशक का प्रयोग करें (बाविस्टिन + मेन्कोजेब)

 मुख्य  क्षेत्र 

  • रोपाई से पहल पौध को स्यूडोमोनास में ५ मिलीलीटर प्रति लीटर की दर से डुबकर रखें 

  • चेपा से बचाव के लिए नीम से बन उत्पादों का छिडकाव करें 

  • थ्रिप्स से बचाव के लिए स्पिनोस्द ४५ एस सी का छिडकाव करें 

  • फल बेधक के लिए फेरोमोन ट्रेप प्रति एकड़ दर से स्थापित करें  

  • समय समय पर  फल बेधक से बचाव के लिए  ट्राईकोग्राम परजीव अण्डों को रिलीज करतें रहें 

  •  फल बेधक से बचाव के लिए एच.ऐ.एन.पी.वी का छिडकाव  २५० लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रारंभिक अवस्था से ही करें 

  • बेधक या गलन से क्षतिग्रस्त या मोसेक वायरस से प्रभावित पौधों को समय समय पर हटात रहें 

  • आवश्यकता अनुसार एफिड के लिए इमिडाक्लोप्रिड, थ्रिप्स के लिए एसिफेट, फल बेधक के लिए इंडोक्साकार्ब  और ०.०२% मेन्कोजेब/बाविस्टिन +कप्टान का छिडकाव कालर स्टेम रोट के लिए करें  

चोप्डियाल 

बुवाई से पहले (अप्रैल - मई ) 

  • बुवाई से ३ हफ्त पहले १०-१५ सेंटीमीटर ऊँचाई की भूमि से उठ बेड्स गोबर की खाद का प्रयोग करक बनायेस उन्हें पारदर्श प्लास्टिक से ढक दें 

 बुवाई (जून) 

  • कार्बनड़ेजिम १ ग्राम प्रति १ किलोग्राम बीज दर से बीज उपचारित करें 

नर्सरी अवस्था (जून -जुलाई)

  • स्यूडोमोनास फार्म्युलेशन का  १०  ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से १ छिडकाव करें 

 प्रत्यारोपण  (जुलाई) 

  • जैव नियंत्रकों  (ट्राईकोडरमा  हर्जिअनम और स्यूडोमोनास फ्लोरीसेन्स ) के घोल में सीडलिंग डुब कर उपचारित करें 

  • प्रमुख  लेपिदोप्तेरस कीटों की निगरान फेरोमोन पाश से करें 

 अगेती वृद्धि अवस्था (जुलाई -अगस्त )

  • भूमि से उठ पौधशाला में बुवाई करें और पानी के जम होने से रोकने का प्रबंध करें 

  • नीम से बन कीटनाशकों /एस.एल. एन.पी.वी. का प्रयोग कीटनाशकों के प्रभाव को करने के लिए करें 

  • स्पोडोप्टेरा लिट्युरा के लार्वों और अण्डों को हाथ से उठायें 

 पछेती वृद्धि अवस्था  (सितम्बर -अक्टूबर )

  • मेन्कोजेब का २ ग्राम प्रति लीटर की दर से प्रयोग करें 

  • कोपर फफुन्दिनाश्कों का प्रयोग करें 

कटाई  अवस्था (अक्टूबर)

  • संक्रमित पौधों का उन्मूलन विनाश करे 

अदरक

पाल और गेंद  

 

बुवाई से पहले

  • ट्राईकोडरमा फार्म्युलेशन  २५० ग्राम प्रति क्विंटल की दर से गोबर खाद/वर्मकम्पोस्ट में मिलाएं . मृद संसोधन के लिए क्लोर्पय्रिफोस ८० मिलीलीटर प्रति २०० स्क्वेयर की दर से प्रयोग करें.

बुवाई

  • मेन्कोजेब (२.५ ग्राम)+ कार्बनडेजिम(१ ग्राम ) +क्लोरपायरिफोस  (२ मिलीलीटर) पानी में १/२ से १ घंटे  तक बीज उपचारित करें

प्रारंभिक  अवस्था

  • मेन्कोजेब (२ ग्राम)+ कार्बनडेजिम (१ ग्राम ) का छिडकाव करें 

  • ट्राईकोडरमा + स्यूडोमोनास (२:१) फार्म्युलेशन का छिडकाव करें 

  • व्हाईट ग्रब को हाथ से पकड़ कर खत्म कर दें 

कटाई की अवस्था 

  •  फसल कटाई  के बाद खेत की गहर जुताई करें 

  • छाया में सुखाने व भण्डारण से पहले चुन हुए बीजमेन्कोजेब (२.५ ग्राम)+ कार्बनडेजिम(१ ग्राम ) +क्लोरपायरिफोस (२ मिलीलीटर) पानी में १/२ से १ घंटे  तक उपचारित करें

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नाशीजीव पूर्व चेतावनी तंत्र तथा  वितरण मानचित्र

 

अमेरिकन सुंडी (हेलीकोवर्प आरमीजेरा)


भारत के ढक्कन में अमेरिकेन सुंडी के पूर्वानुमान लगान हेत एक प्रणाल विकसित की गई है यह कर्नाटक के गुलबर्ग जिल

में प्रमाणित किया गया है

अमेरिकेन सुंडी के आक्रमण स्तर का अनुमान लगाने के लिए प्रयोग विधि

 

मौसम की स्थिति    

अनुमानित स्तर

मानसून में बढ़ोतरी, नवम्बर की वर्षा में कमी     

निम्न

मानसून में कमी ओर नवम्बर की वर्षा में कमी या मानसून में बढोतरी ओर नवम्बर की  वर्षा में बढ़ोतरी    

मध्य

मानसून में कमी ओर नवम्बर की वर्षा        

उच्च

  • रबी की पूर्व फसल की आधारित संपूर्ण संख्य आन वाल खरीफ की फसल में होन वाल संख्या की सूचक होग

  • वर्षा का कुछ भाग अप्रैल माह में होगा (कोई भी मात्र मान्य होगी) १ अंक

  • जुलाई माह की वर्षा (मासिक) २००-४०० मिली मीटर के मध्य होगी १ अंक 

  • अप्रैल ओर मइ  माह के प्रत्येक सप्ताह (१४-२२ मानक सप्ताह) अधिक तापक्रम देगा १ अंक

नाशीजीव वितरण मानचित्र

 

भोगौलिक सूचना  प्रणाली  का प्रयोग करक धान कपास के किये  कीट वितरण मानचित्र तैयार प्रकाशित किय गए (सतहतर मानचित्र: ६६ मानचित्र प्रत्येक वर्ष व ११ प्रमुख स्थानों के)

 

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डेटाबेस व साफ्टवेयर 

 

नाशीजीव प्रबंधन सूचना तंत्र (पी. एम. आई. एस.)

 

कपास, बासमती धान, चना, सरसों और मूंगफली में समेकित नाशीजीव प्रबंधन के लिए सॉफ्टवेर विकसित और विस्तारित किया गया है, (पी. एम. आई. एस.) यह एक उपभोगता मित्रवत सॉफ्टवेर है, जिसमे सस्य क्रियाओं, नाशीजीवों,सूत्रकृमियों, खरपतवार, पोषक तत्वों के अभाव में, होने वाली व्याधियां, मित्र कीटों, प्रतिरोधी किस्मों, फसलों में होने वाली रोगों व् उनके लक्षणों की संपूर्ण जानकारी उच्च गुणवता वालें चित्रों के साथ सम्लित है | सॉफ्टवेर का अग्र भाग Visual Basic तथा पृष्ठ भाग MS _Access  में विकसित किया गया है| यह सॉफ्टवेर सी. डी. रोम के रूप में उपलब्ध है सॉफ्टवेर का अग्र चित्र नीचे प्रदर्शित है

  • कपास

  • बासमती धान

  • चना

  • सरसों

  • मूंगफली

  • टमाटर

पीडकनाशी सलाहकार सॉफ्टवेयर

 

कीटनाशक सलाहकार एक उपयोगी सोफ्टवेयर है जो भारत में पंजीकृत कीटनाशकों, उसके उपयोग, शेल्फ जीवन,अन्तिदोत एवं उत्पादकों की जानकारी प्रदान करता है. इसे विसुअल बेसिक और एम् एस एक्सेस का प्रयोग करके विकसित किया गया है. यह सी डी में भी उपलब्ध है

 

सोफ्टवेयर की विशेषताएं 

  • सभी  जीवनाशीयो  की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध है |

  • जीवनाशीयो की तुलनात्मक वर्णन

  • इसमें जीवनाशियों से सुरक्षा, प्रबंधन, प्राथमिक चिकित्सा, उपयोग करने के तरीके और तकनीक चित्रों एवं चलचित्रों के माध्यम से उपलब्ध है |

  • तीस दिन का परिक्षण वृत्त टिप्पणी  | सूचना के लिए वितरित कर दिया गया है |

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 जैव नियंत्रकों व जैव घटकों का बहु उत्पादन 

 

परजीवी एव परपोषी 

 

प्रयोगशाला में पोषित  भोजनदायी कीड़ें : सी सेफ्लोनिका, हैलीकोवर्पा  आर्मिजेरा

परजीवी: टी. किलोनिस , टी. जेपोनिकम, किलोनिस ब्लाक्बरनी 

परभक्षी: क्राय्सोपर्ल कार्निय

 

जैव नियंत्रक संग्रह का विकास (एंटोमोपैथोजनस)

 

सूक्ष्मजीवियों का सुरक्षा कोष, ट्रैकोडर्मा विरिडी, टी. हारजियेनम, टी. पेलुटीफेरम ग्लायोक्लेडीयम डेलीक्यूसेंस, पेनिसिलियम फ्यूनिक्यूलोसम, कीटोमियम ग्लबोसम, ब्यूवेरिया बेसियाना, मेतारहीजियम एनिसोपली, नोमुरिया रिले, बेसिलस थ्रुजैनेसिस, स्यूडोमोनास फ्लूरोसेंस को विकसित एवं प्रतिपादित किया गया

 

ट्रैकोडर्मा विरिडी, टी. हारजियेनम, ब्यूवेरिया बेसियाना,  मेतारहीजियम एनिसोपली  के बहुत्पादन के मूलरूप विकसित किये गए |

 

आई पी एम कार्यकर्मों के लिए जैव घटक  उत्पादन गतिविधियाँ 

 

विभिन्न सहयोगी  संस्थानों एव आई पी एम परीक्षणों में सूक्षम जीवियों की आपूर्ति हेत सूक्षम जीवेयों का उत्पादन लघ पैमान पर प्रयोगशाला में ही कियजाता है 

 

जैव घटकों का कीटों के निमित मुल्यांकन

 

बी. बेसियाना संवर्धन प्रजाति की विशिष्टता का सत्यापन केंद्र में कियगया. निम्न पर्यवेक्षण केंद्र में  किय गए : सी आई सी आर, नागपुर स्ट्रेन व्हाईट फ्लाई के निमित प्रभावकार पाय गया. पंजाब कृषि विश्व विद्यालय, लुधियाना स्ट्रेन बैंगन के फोम्फोसिस फ्रूट रोट के निमित प्रभाव पाय गयपरन्त हेलिकोवेर्प अर्मिजेरा के प्रति ज्याद प्रभाव नहीं था, जबकि इस केंद्र का स्ट्रेन  हेलिकोवेर्प अर्मिजेरा के प्रति बहुत अधिक प्रभाव सिद्ध हुआ. 

 

ट्राईकोडर्मा के ३० अधिक  पृथ्कों की जांच

  •  १०, १३, २६, २८ व २९ पृथक  ऍफ ओसिपोरुम ऍफ प्रजाति वसिंफेक्टाम के प्रति प्रभाव पाए गए.

  • १०, १२, २१, २२, २३, २५ व २६  पृथक फ्युसरियम सिसेरी के प्रति प्रभाव पाए गए

  • १,१४,१८,१९,२० व २६ पृथक स्केलोर्शिं रोल्सइए के प्रति प्रभाव पाए गए

धान में  मकड़ों के  संरक्षण के लिए  स्ट्र बण्डल तकनीक का विकास

 

धान में मकड़ों के संवर्धन और संरक्षण के लिए पुआल बंडलों का इस्तेमाल करक एक व्यावहारिक तकनीक विकसित की गयी ( लंबाई में 3 फीट और व्यास में 10  इंच). इन बंडलों को मकड़ों एव मित्र कीटों के साथ आवेशित करन हेतु  ज्वर के खेतों में रख गया. आवेशित होने के १५ दिन बाद इन बंडलों को २० दिन पहल प्रतिरोपित  अंकुर धान के खेतों में बम्बू  छडीयों  के साथ लम्बवत २० बण्डल प्रति हेक्टेयर इस तरह से स्थापित किय जाये कि बण्डल का निचल हिस्स पानी के स्तर से ६ इंच ऊपर रह सके. गैर आई पी एम कि तुलना में  इस तकनीक के प्रयोग से मकड़ों कि संख्या में १५.३ लाख प्रति हेक्टेयर मकड़ों कि वृद्धि  हुई जो कि पहले  ४.९ लाख प्रति हेक्टेयर थी. 

 

मिल बग (फिनेकोसस सोलेनोप्सिस ) पर दो नए परजीवियों को रिकोर्ड कियगय 

 

जुलाई और अगस्त २००८ के दौरान पूस कैम्पस आस पास के इलाकों में किय गए सर्वेक्षण में  दो परजीवियों एनसिस बम्बावालेई (Chalcidodea: Encyrtidae) मिलबग पर पार्थेनियम पर  फिनोकोकस सोलेनोप्सिस में ह्य्मेनोप्तेरोउस परजीवी  के कोकून कि उपस्थिति के संकेत मिले. इसक परजीव्त्ता कि सीमा २० से ७०% थी. उसवर्ष परभणी (महारष्ट्र) की पांच अन्य तहसीलों में किय सर्वेक्षण में एक अन्य ह्य्मेनोप्तेरोउस परजीव promuscidea अन्फ़सिअतिवेन्त्रिस गिरौल्ट  (Chalcidodea: Encyrtidae) की उपस्थिति कपास व  पार्थेनियम में मिल बग पर पाय गयी. दोनों परजीवियों ने कपास में मिल बग के पर्याक्रमण को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है व उत्तर और मध्य क्षेत्र के कपास के बढ़त क्षेत्रों में इन पर्जीवेयों की उपस्थिति दर्ज की गयी है. 

 

जैव नियंत्रण प्रयोगशाल और कंसल्टेंसी की स्थापन

 

५० टन वार्षिक से अधिक ट्राईकोडरमा व स्यूडोमोनास के उत्पादन के लिए एक जैव नियंत्रण प्रयोगशालश्र राम सोलवेंट प्राईवेट लिमिटेड , जसपुर (उत्तरांचल) में स्थापित की गयी. राजकीय जैव नियंत्रण प्रयोगशाल, सिरसा, हरियाणा में स्थापित की गयी जो की  कोर्सायर , ट्राईकोडरमा, ट्राईकोग्रामा, बेवेरिय बेसियान और मेटारहिजियम के बह उत्पादन के किय परामर्श प्रदान करती है

 

फेरोमोन

 

एच अर्मिजेरा में वेरिएबल लोडिंग  (१,५ और १० एम् जी ) और अनुपात (९७:३, ९३:७ और ९०:१० जेड -११ और जेड -९ हेक्सदेसेनल ) पर सेक्स फेरोमोन की उपस्थिति की पुष्टि की गयी. एक अनुपात में की गयी कीट निगरानी से कीट की संख्या का केवल कुछ भाग का अनुमान होता है. इसलिए यह महत्वपूर्ण है की कीटों की प्रभावी निगरानी के लिए अधिक मात्रा में इनका उपयोग किया जाये 

 

प्रशिक्षण 

 

१० दिन के ग्यारह प्रशिक्षण  (एक  प्रशिक्षण प्रति वर्ष ) सार्वजानिक एव निजउद्यमियों के लिए जैव नियंत्रकों के बह उत्पादन  तकनीक के लिए आयोजित किय गए. इस प्रशिक्षण का उद्धेश्य  वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं, उद्यमियों, युवाओं  को जैव नियंत्रकों के बह उत्पादन की सटीक जानकार देना था जो कि जैव नियंत्रकों के उत्पादन में  अपन इकाइयाँ स्थापित करन चाहते थे. २०० से अधिक लोगों ने इस प्रशिक्षण से लाभ लिया 

 

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